Wednesday, September 19, 2018

美国代表团:波恩气候峰会上的另类存在

今年的国际气候谈判本应完全围绕提高目标以及在资金支持、适应以及损失弥补措施等方面取得进展而展开。在 会议上,各国需要通力合作,找出更快减少温室气体排放的方案。联合国环境署的一份最新报告强调,如果我们不能在更短时间内取得更多进展的话,那么到本世纪末地球气温将上升三摄氏度。

但是,美国总统唐纳德·特朗普宣布要退出《巴黎协定》,打乱了上述一切计划。美国是对气候变化贡献最大的国家,美国的退出将导致严重问题。但这究竟意味着什么?

首先,美国尚未真正退出《巴黎协定》。即便美国真的要退出,最早也要等到2020年11月初。而这一时间点刚好是特朗普面临连任竞选的时候(如果他确定再次竞选的话),而他的对手几乎可以肯定会支持气候行动。

美国气候谈判代表仍将出席波恩的会议,但他们将发挥怎样的作用却仍有待观察。考虑到特朗普对于气候行动的敌意以及他对煤炭的热爱,美国代表团的作用恐怕不会是建设性的。我们已经确知的是,特朗普总统曾明确表示反对用于支持发展中国家应对气候变化的绿色气候基金,认为基金“浪费了美国一大笔钱”,“好多好多好多亿美元”。

实际上,到目前为止美国的贡献比特朗普所说的少很多。美国承诺贡献总额30亿美元(约合200亿元人民币),而至今为止实际贡献了10亿美元(约合66亿元人民币)。预计美国近期不会继续提供资金,而这将激怒那些本就指责美国没有充分尽责的发展中国家。

但是我们仍有理由对于美国在波恩以及未来继续发挥积极作用抱有希望。美国除联邦外的各级政府均将派代表参加波恩会议,且主要目的就是表明他们仍将致力于兑现美国在巴黎做出的承诺。

在美国国内,成千上万的市长、州长、部落首领、企业高管以及普通美国人都在努力降低温室气体排放。这个名为“我们仍在守约)”的联盟的成员代表了美国一半以上的人口以及54%的经济产出。加州州长杰瑞·布朗与迈克尔·布隆伯格联合发起了一项倡议,收集整理并量化这些自发的行动,以确保美国兑现其在《巴黎协定》下做出的碳减排承诺。

他们这么做是有政治和经济动机的,因为民调显示,美国民众强烈支持《巴黎协定》以及发展清洁能源。清洁能源产业已经蓬勃发展,太阳能光伏设备安装技师以及风力发电涡轮检修工人是美国就业增长最快的两个工种。除此之外,还有其他动机支持这样的行动。即将发布的《美国国家气候评估报告》草稿近期流出,报告指出,气候变化已经在加剧哈维、厄玛、玛利亚等飓风以及加州等地山火等极端天气现象的影响了。

今年的飓风季已经成为历史上造成损失最严重的一年,而政府问责局新近发布的一份报告显示,未来美国将承受的气候变化相关成本将增加数十亿美元,到2050年或将达到每年350亿美元(约合2320亿元人民币)。被飓风玛利亚摧毁的圣胡安市市长很可能将出席波恩会议,并现身说法,证明美国有必要在应对气候变化的行动中发挥应尽角色。

在缺少美国作为领袖的气候谈判中,其他国家或将挺身而出。中国国家主席习近平近期重申了中国对于气候行动和落实《巴黎协定》的承诺,但鉴于中国不属于发达国家,其可以发挥的作用有限。正常情况下,欧盟此时应该有望担负起领导的重任,但正在进行的德国联合政府谈判以及英国脱欧可能限制欧盟在波恩的作为。
说到底,要阻止危险的气候变化,美国必须兑现、甚至超额兑现其在《巴黎协定》下的目标。我们欢迎各城市、州及商业机构自发采取行动,而这些行动也将产生切实的积极作用。但是,我们仍然希望美国联邦政府尽早回归谈判、参与对话并认真对待其所做出的国际承诺,越早越好。

Thursday, September 13, 2018

生物燃料项目危及肯尼亚湿地

国《卫报》周二报道说,肯尼亚已批准一项具争议性的生物燃料项目。该项目将在一容易出现粮食短缺的地区进行。农民和渔民都担心把200多平方公里的塔纳河三角洲变成甘蔗种植场后,他们的生计将被摧毁 。 ,当地上市公司马赛糖业所提议这一项目将是"一个生态和社会的灾难"。

他说,"这将严重损害我们无价的国家资产,并会危及到三角洲居民的生计。"

发展活动家说,在非洲的耕地不应该用来种植非食用作物,特别是在容易出现食物短缺在地区。
英国《卫报》周一报道说,世界顶尖气候科学家詹姆士‧汉森将在美国国会的演讲中呼吁以侵害人权及大自然的罪名把大型化石燃料公司的首席执行官送上法庭。
目前作为美国宇航局戈达德太空研究所主任的汉森将在他曾向国会发表关于全球变暖重要讲话的二十周年之际而发表演说。他指责化石燃料公司的负责人热衷发布有关气候变化原因的虚假信息。

报道指出,汉森正呼吁停建新燃煤发电厂,但同时建立耗资低的发电网以助加强风能和太阳能发电与石化燃料相比的竞争力。
近170个国家的部长们正在印度尼西亚的巴厘岛举行会晤,讨论如何处理危险废物所带来的风险。参与者将考虑为电子和电脑废物成立一个新的管理机构。
这一为期五天的会议将重点讨论废物对人类健康和生活的影响。英国广播公司报道说,从船事件造成的污染到水银中毒等所有类型的危险废物的报告均在议程之内。

这次会议是在控制全球危险废物交易的国际公约,即联合国巴塞尔公约下组织进行的。

中国已批准了巴塞尔公约,然而绿色和平却说,仍然有大量的电子废物从美国途经香港进入中国南部。
据国家媒体报道,中国环保部表示政府将对造成土壤污染的公司施压,让它们承担应有的责任。
《中国日报》报道,环保部将加强措施,让污染环境的公司承担责任。该部指出,管理架构的改变、公司合并或解散将不会再影响公司承担对土壤污染的责任。

报道说,土壤污染已越来越对公众健康构成危害。中国科学院院士孙铁珩说:“土地污染已直接导致了食品质量的下降。”

报道说,超过10%的中国耕地已受到污染。
中国农村能源发展项目,一项已为中国西部偏远地区160万居民提供电力的中国领先太阳能计划,已获得了两万英磅(合  美元)的"阿什登可持续能源奖"。
该项目技术改进部门经理罗新连于周四在伦敦举办的仪式上接受了该奖项。肯尼亚诺贝尔和平奖得主旺加里·马塔伊也同时为其他七个国际项目和几个英国项目颁奖。

该中国项目2001年由中国国家发改委和世界银行共同发起,已向中国西部9个省份的无电供给的住户中促进了光伏太阳能发电系统的安装和使用。该项目迄今已提供了40多万个小型家用太阳能系统,为用户带来更明亮,清洁的照明。
得到世界最大商业公司管理者支持的对抗气候变化的详细倡议书周五被提交给了日本首相福田康夫。福田康夫将主持今年7月的八国峰会。
这份代表世界经济论坛而呈现给八国集团领导人的倡议书,概述了一个继京都协议后的更具" 环境和经济效益"的长期政策框架。

企业管理者要求政府采取迅速而根本的策略来促进一个低碳的全球经济。他们呼吁八国首脑和其它发达国家领导人来倡导深入和切实的温室气体减排。同时,他们也呼吁政府与国际商业社会合作来开发碳减排机会。

Monday, September 3, 2018

स्तनपान का मामला आख़िर कोर्ट में क्यों है

आप ख़ुद बताइए मां बनना कोई जुर्म है क्या, नहीं न...तब बच्चे को ब्रेस्टफ़ीड कराना जुर्म कैसे हो जाता है? सार्वजनिक जगह पर अपने बच्चे को ब्रेस्टफ़ीड कराओ तो लोग ऐसे देखते हैं जैसे कोई क्राइम कर रहे हों."
ये कहना है नेहा रस्तोगी का. वही नेहा जिन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में सार्वजनिक जगहों पर ब्रेस्टफ़ीडिंग सेंटर बनाने के लिए अपने नौ महीने के बच्चे के नाम पर जनहित-याचिका डाली है. लेकिन क्या ये परेशानी सिर्फ़ नेहा की है?
शायद नहीं. ये परेशानी उन तमाम मांओं की है जिनके बच्चे अभी छोटे हैं और जिन्हें घर से बाहर निकलना पड़ता है.
नेहा कहती हैं, "मुझे समझ नहीं आता कि अभी तक किसी ने इस बारे में सोचा क्यों नहीं. ब्रेस्ट फ़ीड कराना कोई नई बात तो है नहीं, लेकिन आज तक किसी ने इसकी ज़रूरत नहीं समझी, ये भी आश्चर्य की ही बात है."
नेहा की याचिका पर आधे घंटे की बहस के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और नगर निकायों को इस संबंध में नोटिस भेजकर जवाब मांगा है.
"इस बात का पहला ख़्याल तब आया जब मैं खुद मां बनी. "
नेहा का नौ महीने का बेटा है.
"अव्यान के जन्म के बाद मुझे लगा कि पब्लिक प्लेसेस पर ब्रेस्टफ़ीडिंग सेंटर होने चाहिए. कई बार ऐसा होता है कि जगह नहीं होने की वजह से मैं उसे दूध नहीं पिला पाती और वो भूख से तड़प उठता."
नेहा और उनके पति अनिमेश रस्तोगी दोनों ही दिल्ली हाई कोर्ट में एडवोकेट हैं. उनकी मांग सिर्फ़ फ़ीडिंग स्पेस की नहीं है. वो चाहती हैं कि सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं और बच्चों के लिए चेंजिंग रूम भी होने चाहिए.मेरी मांग सिर्फ़ ब्रेस्टफ़ीड रूम की नहीं है, मैं चाहती हूं कि फ़ीडिंग रूम के साथ ही चेंजिंग रूम की भी सुविधा होनी चाहिए क्योंकि बच्चे के कपड़े चेंज कराना, उनके डायपर बदलना जैसे बहुत से कम होते हैं."
दिल्ली में रहने वाली गरिमा की भी लगभग यही कहानी है. उनकी भी 3 साल की बेटी है. गरिमा बताती हैं कि भले ही आज मेरी बेटी तीन साल की हो गई हो लेकिन जब वो छोटी थी तो मैंने बहुत परेशानी उठाई है.
गरिमा कहती हैं, "कई बार तो ऐसा होता था कि मेरी बेटी रोती रह जाती थी लेकिन मैं उसे दूध नहीं पिला पाती थी. मां की छटपटाहट बस वो ही समझ सकती है."
एक्टिंग चीफ़ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी हरि शंकर ने इस मामले की सुनवाई हुई. नेहा इस मामले में मुख्य याचिकाकर्ता नहीं हैं. ये याचिका उनके नौ महीने के बच्चे अव्यान की ओर से डाली गई है और नेहा बतौर अभिभावक ये मामला देख रही हैं.
नेहा की ओर से मामले की पैरवी कर रहे अनिमेश कहते हैं, "जैसे ही कोई बच्चा पैदा होता है उसे वो तमाम मौलिक अधिकार प्राप्त हो जाते हैं जो एक बालिग के हैं. याचिका पर हस्ताक्षर करने के लिए न्यूनतम उम्र 18 वर्ष होनी चाहिए लेकिन अगर कोई नाबालिग याचिका डाल रहा है तो उसके अभिभावक उसके नाम से आवेदन कर सकते हैं."
नेहा का कहना है कि हमारे देश में औरतों से जुड़ी परेशानियों को शायद परेशानी समझा ही नहीं जाता है.
"आप ख़ुद सोचिए एक औरत जो नौ महीने की प्रेग्नेंसी के बाद खुद ही बाहरी दुनिया से कट जाती है अगर उसे इस तरह की परेशानी उठानी पड़े तो क्या वो घर के बाहर निकलन की हिम्मत जुटा पाएगी? इसका असर उसके मेंटल लेवल पर नहीं होगा? "
नेहा मानती हैं कि हमारे देश में लोग स्मोकिंग ज़ोन बनाने को लेकर तो जागरुक हैं, लेकिन उनके लिए एक मां और उसके बच्चे को लेकर कोई चिंता नहीं है.
नवंबर 2016 में आरजेडी की राज्यसभा सांसद मीसा भारती संसद परिसर में अपने तीन महीने के बेटे के साथ संसद सत्र में हिस्सा लेने पहुचीं, लेकिन बच्चे को राज्यसभा के अंदर ले जाने की इजाजत नहीं होने की वजह से मीसा को अपने अपने बच्चे को पति शैलेष के साथ पार्टी के कमरे में ही छोड़ना पड़ा.
इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया की सांसद लैरिसा वॉटर्स भी अपनी बेटी को संसद में स्तनपान कराने को लेकर सुर्खियों में आ गई थीं.
रोज़ाना मेट्रो में सफ़र करने वाली चेतना कहती हैं कि भारत में सार्वजनिक जगह पर स्तनपान कराना बहुत मुश्किल है. मर्दों के साथ-साथ औरतों की नज़र भी अजीब तरीक़े से घूरती हैं.हा की इस याचिका को आधार बनाकर बीबीसी ने लोगों से कहासुनी में राय जाननी चाही. जिस पर बहुत सारी प्रतिक्रियाएं भी मिलीं.
कमलेश यादव का मानना है कि सार्वजनिक जगहों पर दूध पिलाने की व्यवस्था होनी चाहिए क्योंकि ममता की कोई सीमा नहीं होती.
सूर्य एन राव कहते हैं बिल्कुल होना चाहिए क्योंकि हम भी कभी उस उम्र में थे.
अकील अहमद का मानना है कि सरकार कहां तक व्यवस्था करेगी लेकिन अगर औरत ऑफिस में काम करती है तो उसके लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए.