Wednesday, June 26, 2019

दर्शकों को उनके द्वारा निभाया गया महिला का रोल काफ़ी

वे कहते हैं कि प्रियंका का शुक्रिया अदा करना सही लगा क्योंकि वो शूटिंग शुरु होने से पांच दिन पहले ही आकर फ़िल्म के लिए मना किया कि मैं ये फ़िल्म छोड़ रही हूं. और अगर प्रियंका मना नहीं करती तो कैटरीना कैफ़ को इस फ़िल्म में काम करने का मौका कैसे मिलता.
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सलमान ख़ान कहते हैं, ''इस फ़िल्म में कैटरीना का रोल बहुत अच्छा है. लेकिन अभी प्रियंका जो किरदार निभा रही हैं वो उससे भी ज्यादा अच्छा है यानि एक पत्नी का.
वे बताते हैं कि उनकी मज़बूरी थी उन्होंने मुझे मना किया. मैने कहा था कि शूटिंग की डेट आगे बड़ा देंगे लेकिन वे नहीं मानी.
वे इस जोड़ते हैं ''उन्होंने बॉलीवुड और हॉलीवुड में इतनी मेहनत की है और अपनी एक पहचान बनाई है. उनके करियर की बड़ी फ़िल्म थी ऐसे में इतना बड़ा फ़ैसला लेना काबिले तारीफ है.''
''हालांकि उनके ज़हन में ये भी चल रहा होगा कि ये फ़िल्म छोड़ दूंगी तो आगे सलमान के साथ काम मिलेगा भी या नहीं. लेकिन उन्होंने अपना फ़ैसला चुना और शादी की ये कमाल की बात थी वरना बड़े रोल के लिए तो लोग अपना पति तक छोड़ देते हैं.''
फ़िल्म का निर्देशन अली अब्बास जफ़र ने किया है. यह फिल्म 5 जून को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी.
भारतीय सिनेमा एक ऐसी जगह है जहाँ आमतौर पर लव स्टोरीज़ ही चलती आई हैं या फिर एक ऐसा हीरो जो सबकी नज़रे अपनी ओर खींच लेता है.
इसलिए कई किरदार कुछ नया करने की दौड़ में हमेशा शामिल रहते हैं. और ये दौड़ भारतीय सिनेमा में हमेशा रहती है.
कुछ अच्छा करने की इस दौड़ में कई पुरुष किरदार महिला के किरदार निभाने में भी नहीं हिचके, जिनमें गोविंदा, रितेश देशमुख, आमिर खान, कमल हासन,आशुतोष राणा जैसे कई नाम शामिल हैं.
लेकिन अब इसी लिस्ट में एक नया नाम अक्षय कुमार का जुड़ने जा रहा है. हालांकि उन्होंने इससे पहले भी फ़िल्म 'खिलाड़ी' में एक महिला का किरदार निभाया था लेकिन वो उस महिला (अक्षय कुमार) पर आधारित नहीं था. उस फ़िल्म में गर्ल्स हॉस्टल में रहने के लिए अक्षय कुमार और दीपक तिजोरी लड़की बन गए थे.
लेकिन हाल ही में अक्षय कुमार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपनी फ़िल्म 'लक्ष्मी बॉम्ब' का पोस्टर जारी किया, जिसमें वे आंखों में काजल लगाते हुए दिख रहे हैं. इस के कारण कयास लगाए जा रहे हैं कि वे किसी महिला या किन्नर का किरदार निभाएंगे.
जैसे ही उन्होंने सोशल मीडिया पर ये पोस्टर साझा किया फिल्म के निर्देशक राघव लॉरेंस नाराज हो गए. क्योंकि उनके बताए बिना ही फिल्म का पोस्टर जारी कर दिया गया.
ये किरदार और कोई नहीं बल्कि उन पुरुष किरदार के हैं जिन्होंने एक महिला या किन्नर का किरदार निभाया.
जानते हैं ऐसे ही कुछ किरदारों के बारे में जानते हुए जिन्होंने पुरुष होते हैं महिला या किन्नर के किरदार में खूब वाह-वाही लूटी और भारतीय सिनेमा पर अपनी छाप हमेशा के लिए छोड़ दी.
आप 1999 की संघर्ष को ज़रा भी नहीं भूल पाएंगे, तनुजा चंद्रा द्वारा निर्देशित संघर्ष में आशुतोष राणा ने किन्नर का किरदार निभा कर हर किसी की साँसे रोक दी थी.
फ़िल्म में आशुतोष राणा एक सनकी की भूमिका में नज़र आते हैं . यह फ़िल्म अपने समय की सुपरहिट फ़िल्मों में से एक थी. इस फ़िल्म के लिए आशुतोष राणा को बेस्ट विलेन का अवॉर्ड मिला था.
क दौर था जब भारतीय सिनेमा के विलेन हीरो को कड़ी चुनौती देते थे. हिंदी सिनेमा में कई ऐसे विलेन हुए जिनका नाम आज भी सभी की ज़ुबान पर हैं.
ऐसा ही एक किरदार है 1991 की फ़िल्म 'सड़क' की महारानी का. सदाशिव अमरापुरकर ने 'सड़क' फ़िल्म में महारानी का किरदार निभाया था, जो एक विलेन की भूमिका का था. लेकिन उसे लोगों ने बहुत पसंद किया था. इस रोल के लिए उन्हें अवॉर्ड से भी नवाजा गया था.
कमल हासन की 'चाची 420' फ़िल्म 1997 में आई थी, जिसमें कमल अपनी बेटी के लिए कामवाली बाई बनते हैं. उनकी पत्नी तब्बू अपने पति का घर छोड़कर अपने पिता के यहां रहने लगती है.दोनों की एक बेटी भी है जिसके साथ समय बिताने के लिए वे तब्बू के पिता अमरेश पुरी के घर में कामवाली बाई बन जाते हैं, जिन्हें सब चाची कह कर बुलाते हैं.
फ़िल्म को दर्शकों का खूब प्यार और साथ मिला. कमल हसन के किरदार को लोगों ने इतना पसंद किया कि फ़िल्म का नाम सुनते ही उन्हें सबसे पहले कमल हासन का नाम याद आता है.
फिल्म में वे एक पावरफुल महिला के रूप में दिखते हैं जो कई गुंडों से अकेले ही लड़ जाती हैं.
गोविंदा जब फ़िल्मों आते थे तो उनका एक अलग ही दौर था. उनके डांस, बोलने के ढ़ंग, नाचने के अंदाज पर लोग कायल हो गए थे.
वे नए नए किरदार में आते और उनके चाहने वालों की तादाद बढ़ती जाती. 'आंटी नंबर 1' फ़िल्म 1998 में आई थी. वैसे तो कई फ़िल्मों में महिला का किरदार निभाया है लेकिन आंटी नंबर वन पूरी फ़िल्म उनेक इसी रोल पर आधारित थी.