Tuesday, August 20, 2019

कश्मीर: ट्रंप ने कहा स्थिति 'विस्फोटक', फिर की मध्यस्थता की पेशकश

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कश्मीर की स्थिति को 'विस्फोटक' और जटिल बताते हुए एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की है.
डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस हफ़्ते के आख़िर में वह फ्रांस में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे.
ट्रंप का कहना है कि कश्मीर एक जटिल समस्या है. उन्होंने कहा, "यहां हिंदू भी हैं और मुसलमान भी और मैं ये नहीं कहूंगा कि उनके बीच ज़्यादा मेलजोल है."
"यह मसला बहुत लंबे अरसे से चल रहा है और ये एक जटिल मामला है. मैं इसमें मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहा हूं. प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और मोदी से मेरे अच्छे संबंध हैं. इस हफ्ते के अंत में मैं मोदी से मुलाकात भी करूंगा."
ट्रंप ने कहा कि वो भारत और पाकिस्तान के नेताओं के साथ संपर्क में हैं.
इमरान ख़ान ने बार-बार अमरीका से कश्मीर के मामले में हस्तक्षेप और मध्यस्थता करने की मांग की है.
इससे पहले भी राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के अमरीकी दौरे के दौरान कश्मीर पर मध्यस्थता की पेशकश कर दी थी और कहा था कि मोदी ने उनसे कश्मीर के मुद्दे पर मध्यस्थता करने को कहा था. लेकिन भारत ने ट्रंप के इस दावे को ख़ारिज कर दिया था.
कश्मीर पर राष्ट्रपति ट्रंप का ये ताज़ा बयान प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के साथ फोन पर की गई अलग-अलग बातचीत के बाद आया है.
ट्रंप ने इमरान ख़ान और मोदी से फोन पर इस बारे में बातचीत की थी. ट्रंप ने दोनों नेताओं से तनाव कम करने की अपील की. उन्होंने पाकिस्तान को कश्मीर पर भारत के साथ अपनी बयानबाजी को नियंत्रित करने की भी सलाह दी.
इससे पहले सोमवार को पीएम मोदी ने ट्रंप के साथ 30 मिनट की फोन पर बातचीत की, जिसमें पीएम मोदी ने पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा कि कुछ नेताओं ने भारत विरोधी हिंसा को चरम पर पहुंचाने के लिए बयानबाजी की है जो शांति के लिए अनुकूल नहीं है.
उधर पाकिस्तान ने कहा है कि वह कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में उठाने की तैयारी कर रहा है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने यह बात कही है.
इस सप्ताहांत डोनल्ड ट्रंप और मोदी फ्रांस में जी7 की बैठक के दौरान मुलाकात करेगें जहां ट्रंप मोदी के समक्ष इस मुद्दे पर बात कर सकते हैं.
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भारत-नेपाल संयुक्त आयोग की पांचवी बैठक में हिस्सा लेने के लिए आज नेपाल जा रहे हैं. जहां वो नेपाल के अपने समकक्ष प्रदीप कुमार ग्यावाली से मुलाक़ात करेंगे.
बीबीसी हिन्दी रेडियो ने एस जयशंकर की यात्रा के संबंध में, भारत-पाकिस्तान रिश्तों पर, अनुच्छेद 370 पर और चीन-नेपाल बनाम भारत-नेपाल संबंधों पर नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावाली से बात की.
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर नेपाल आ रहे हैं. एक पड़ोसी मुल्क होने के नाते नेपाल इस यात्रा से क्या उम्मीदें रखता है?
ये तो सभी लोग जानते हैं कि नेपाल और भारत के बीच बहुत क़रीबी संबंध हैं. ये संबंध सिर्फ़ राजनीतिक स्तर पर ही नहीं है. ये संबंध बेहद व्यापक हैं. लोगों के स्तर पर, व्यापारिक स्तर पर, आर्थिक स्तर पर, सांस्कृतिक स्तर पर हमारे संबंध बहुत मज़बूत हैं और इस मज़बूत संबंध को और मज़बूत बनाने के लिए दोनों देशों के बीच कई तरह की प्रक्रियाएं हैं.
और उसी में एक ये संयुक्त आयोग की बैठक है जिसमें दोनों देशों के समकक्ष मिलेंगे. हमारी उम्मीद है कि जिस तरह से बीते कई सालों से हमारे संबंध बेहतर होते रहे हैं ये बैठक हमारे संबंधों को और बेहतर करेगी. हमारी उम्मीद है कि ये बैठक हमारे संबंधों को और सुदृढ़ बनाएगी.

Wednesday, June 26, 2019

दर्शकों को उनके द्वारा निभाया गया महिला का रोल काफ़ी

वे कहते हैं कि प्रियंका का शुक्रिया अदा करना सही लगा क्योंकि वो शूटिंग शुरु होने से पांच दिन पहले ही आकर फ़िल्म के लिए मना किया कि मैं ये फ़िल्म छोड़ रही हूं. और अगर प्रियंका मना नहीं करती तो कैटरीना कैफ़ को इस फ़िल्म में काम करने का मौका कैसे मिलता.
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सलमान ख़ान कहते हैं, ''इस फ़िल्म में कैटरीना का रोल बहुत अच्छा है. लेकिन अभी प्रियंका जो किरदार निभा रही हैं वो उससे भी ज्यादा अच्छा है यानि एक पत्नी का.
वे बताते हैं कि उनकी मज़बूरी थी उन्होंने मुझे मना किया. मैने कहा था कि शूटिंग की डेट आगे बड़ा देंगे लेकिन वे नहीं मानी.
वे इस जोड़ते हैं ''उन्होंने बॉलीवुड और हॉलीवुड में इतनी मेहनत की है और अपनी एक पहचान बनाई है. उनके करियर की बड़ी फ़िल्म थी ऐसे में इतना बड़ा फ़ैसला लेना काबिले तारीफ है.''
''हालांकि उनके ज़हन में ये भी चल रहा होगा कि ये फ़िल्म छोड़ दूंगी तो आगे सलमान के साथ काम मिलेगा भी या नहीं. लेकिन उन्होंने अपना फ़ैसला चुना और शादी की ये कमाल की बात थी वरना बड़े रोल के लिए तो लोग अपना पति तक छोड़ देते हैं.''
फ़िल्म का निर्देशन अली अब्बास जफ़र ने किया है. यह फिल्म 5 जून को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी.
भारतीय सिनेमा एक ऐसी जगह है जहाँ आमतौर पर लव स्टोरीज़ ही चलती आई हैं या फिर एक ऐसा हीरो जो सबकी नज़रे अपनी ओर खींच लेता है.
इसलिए कई किरदार कुछ नया करने की दौड़ में हमेशा शामिल रहते हैं. और ये दौड़ भारतीय सिनेमा में हमेशा रहती है.
कुछ अच्छा करने की इस दौड़ में कई पुरुष किरदार महिला के किरदार निभाने में भी नहीं हिचके, जिनमें गोविंदा, रितेश देशमुख, आमिर खान, कमल हासन,आशुतोष राणा जैसे कई नाम शामिल हैं.
लेकिन अब इसी लिस्ट में एक नया नाम अक्षय कुमार का जुड़ने जा रहा है. हालांकि उन्होंने इससे पहले भी फ़िल्म 'खिलाड़ी' में एक महिला का किरदार निभाया था लेकिन वो उस महिला (अक्षय कुमार) पर आधारित नहीं था. उस फ़िल्म में गर्ल्स हॉस्टल में रहने के लिए अक्षय कुमार और दीपक तिजोरी लड़की बन गए थे.
लेकिन हाल ही में अक्षय कुमार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपनी फ़िल्म 'लक्ष्मी बॉम्ब' का पोस्टर जारी किया, जिसमें वे आंखों में काजल लगाते हुए दिख रहे हैं. इस के कारण कयास लगाए जा रहे हैं कि वे किसी महिला या किन्नर का किरदार निभाएंगे.
जैसे ही उन्होंने सोशल मीडिया पर ये पोस्टर साझा किया फिल्म के निर्देशक राघव लॉरेंस नाराज हो गए. क्योंकि उनके बताए बिना ही फिल्म का पोस्टर जारी कर दिया गया.
ये किरदार और कोई नहीं बल्कि उन पुरुष किरदार के हैं जिन्होंने एक महिला या किन्नर का किरदार निभाया.
जानते हैं ऐसे ही कुछ किरदारों के बारे में जानते हुए जिन्होंने पुरुष होते हैं महिला या किन्नर के किरदार में खूब वाह-वाही लूटी और भारतीय सिनेमा पर अपनी छाप हमेशा के लिए छोड़ दी.
आप 1999 की संघर्ष को ज़रा भी नहीं भूल पाएंगे, तनुजा चंद्रा द्वारा निर्देशित संघर्ष में आशुतोष राणा ने किन्नर का किरदार निभा कर हर किसी की साँसे रोक दी थी.
फ़िल्म में आशुतोष राणा एक सनकी की भूमिका में नज़र आते हैं . यह फ़िल्म अपने समय की सुपरहिट फ़िल्मों में से एक थी. इस फ़िल्म के लिए आशुतोष राणा को बेस्ट विलेन का अवॉर्ड मिला था.
क दौर था जब भारतीय सिनेमा के विलेन हीरो को कड़ी चुनौती देते थे. हिंदी सिनेमा में कई ऐसे विलेन हुए जिनका नाम आज भी सभी की ज़ुबान पर हैं.
ऐसा ही एक किरदार है 1991 की फ़िल्म 'सड़क' की महारानी का. सदाशिव अमरापुरकर ने 'सड़क' फ़िल्म में महारानी का किरदार निभाया था, जो एक विलेन की भूमिका का था. लेकिन उसे लोगों ने बहुत पसंद किया था. इस रोल के लिए उन्हें अवॉर्ड से भी नवाजा गया था.
कमल हासन की 'चाची 420' फ़िल्म 1997 में आई थी, जिसमें कमल अपनी बेटी के लिए कामवाली बाई बनते हैं. उनकी पत्नी तब्बू अपने पति का घर छोड़कर अपने पिता के यहां रहने लगती है.दोनों की एक बेटी भी है जिसके साथ समय बिताने के लिए वे तब्बू के पिता अमरेश पुरी के घर में कामवाली बाई बन जाते हैं, जिन्हें सब चाची कह कर बुलाते हैं.
फ़िल्म को दर्शकों का खूब प्यार और साथ मिला. कमल हसन के किरदार को लोगों ने इतना पसंद किया कि फ़िल्म का नाम सुनते ही उन्हें सबसे पहले कमल हासन का नाम याद आता है.
फिल्म में वे एक पावरफुल महिला के रूप में दिखते हैं जो कई गुंडों से अकेले ही लड़ जाती हैं.
गोविंदा जब फ़िल्मों आते थे तो उनका एक अलग ही दौर था. उनके डांस, बोलने के ढ़ंग, नाचने के अंदाज पर लोग कायल हो गए थे.
वे नए नए किरदार में आते और उनके चाहने वालों की तादाद बढ़ती जाती. 'आंटी नंबर 1' फ़िल्म 1998 में आई थी. वैसे तो कई फ़िल्मों में महिला का किरदार निभाया है लेकिन आंटी नंबर वन पूरी फ़िल्म उनेक इसी रोल पर आधारित थी.

Tuesday, May 28, 2019

शहर में चार दशकों से काम कर रहे वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद भार्गव

इसके अलावा अख़बार ने अमेठी में स्मृति इरानी के लिए प्रचार करने वाले सुरेंद्र सिंह की हत्या से जुड़ी ख़बर को पहले पन्ने पर जगह दी है. अख़बार के अनुसार, सुरेंद्र की हत्या चुनावी रंज़िश का नतीजा थी. पुलिस ने इस मामले में अभी तक तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है.
पहले नाम पूछा फिर गोली मार दी
द हिंदू के अख़बार ने बेगूसराय में युवक को नाम पूछकर गोली मारने की घटना को पहले पन्ने पर जगह दी है. अख़बार के मुताबिक, बिहार के बेगूसराय में मोहम्मद कासिम से पहले उनका नाम पूछा गया और उसके बाद उन्हें गोली मार दी गई. स्थानीय थाने में एफ़आईआर दर्ज की गई है. लेकिन अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है.
जापान के कावासाकी शहर में एक हमलावर ने बस का इंतज़ार कर रहे स्कूली बच्चों पर चाकू से हमला कर दिया. बताया जा रहा है कि हमले में दो लोगों की मौत हो गई है और कम-से-कम 16 लोग घायल हैं. पुलिस ने हमले में एक लड़की के मारे जाने की पुष्टि की है.
संदिग्ध ने गिरफ़्तारी से पहले अपनी गर्दन पर भी चाकू हमला किया. रिपोर्टों के मुताबिक अब उसकी मौत हो गई है. हमले का मक़सद अभी स्पष्ट नहीं है.
सरकारी प्रसारक एनएचके के मुताबिक पुलिस को मौके से दो चाकू बरामद हुए हैं.
कावासाकी अग्नीशमन विभाग के एक कर्मचारी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया है कि हमले के बारे में पहली कॉल स्थानीय समयानुसार सुबह 07.44 बजे की गई थी.
एक चश्मदीद ने एनएचके से कहा, "मैंने बस स्टॉप के पास एक व्यक्ति को रक्तरंजित देखा. स्कूली बच्चे भी सड़क पर पड़े थे. ये एक शांत जगह है. यहां इस तरह का दृश्य देखना परेशान करने वाला है."
जापान के कावासाकी शहर में एक हमलावर ने बस का इंतज़ार कर रहे स्कूली बच्चों पर चाकू से हमला कर दिया. बताया जा रहा है कि हमले में दो लोगों की मौत हो गई है और कम-से-कम 16 लोग घायल हैं. पुलिस ने हमले में एक लड़की के मारे जाने की पुष्टि की है.
संदिग्ध ने गिरफ़्तारी से पहले अपनी गर्दन पर भी चाकू हमला किया. रिपोर्टों के मुताबिक अब उसकी मौत हो गई है. हमले का मक़सद अभी स्पष्ट नहीं है.
सरकारी प्रसारक एनएचके के मुताबिक पुलिस को मौके से दो चाकू बरामद हुए हैं.
कावासाकी अग्नीशमन विभाग के एक कर्मचारी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया है कि हमले के बारे में पहली कॉल स्थानीय समयानुसार सुबह 07.44 बजे की गई थी.
एक चश्मदीद ने एनएचके से कहा, "मैंने बस स्टॉप के पास एक व्यक्ति को रक्तरंजित देखा. स्कूली बच्चे भी सड़क पर पड़े थे. ये एक शांत जगह है. यहां इस तरह का दृश्य देखना परेशान करने वाला है."
50 के दशक तक ग्वालियर के सिंधिया राज घराने के 'समर कैपिटल' के तौर पर मशहूर रहा शिवपुरी शहर आज 2019 की गर्मियों में 46 डिग्री पर तप रहा है. शहर में प्रवेश करते ही चारों ओर चक्कर लगाते पानी के टैंकर ध्यान खींचते हैं.
29 नंबर वार्ड के सइसपुरा मोहल्ले में सड़क के किनारे खड़े एक टैंक से मटके में पानी भरते स्थानीय नागरिक अजय सिंह बताते हैं कि शहर में लंबे वक़्त से पानी की समस्या रही है.
"यहां पानी का बड़ा संकट है. कई महीनों से तो हम लोगों को पीने का पानी भी खरीदकर पीना पड़ रहा है. इसी वजह से लोग ग़ुस्से में हैं. तभी इस चुनाव में पहली बार महाराज भी हार गए."
शिवपुरी शहर मध्यप्रदेश के गुना लोकसभा क्षेत्र का संसदीय मुख्यालय है और जिन 'महाराज' का ज़िक्र अजय ने अपनी बात में किया वह सिंधिया घराने के वारिस और गुना लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं.
2002 से 2014 तक लगातार चार बार गुना लोकसभा सीट से जीतते आ रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी पाँचवीं चुनावी लड़ाई भारतीय जनता पार्टी के कृष्णपाल सिंह यादव से 1,25,549 वोटों के भारी अंतर से हर गए.
2019 के चुनावों में गुना लोकसभा सीट के नतीजे मध्यप्रदेश कांग्रेस के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी के लिए निराशा का कारण बन कर उभरे हैं. ख़ास तौर पर इसलिए क्योंकि इस सीट को सिंधिया परिवार का गढ़ माना जाता रहा है.
मध्यप्रदेश के अस्तित्व में आने के बाद से ही विजया राजे सिंधिया, माधव राव सिंधिया और ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत सिंधिया परिवार के अलग-अलग सदस्य इस सीट से जीतते रहे हैं. साथ ही ज्योतिरादित्य सिंधिया की यह हार इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आज़ादी के बाद यह ग्वालियर राजघराने या 'महल' के किसी व्यक्ति की पहली चुनावी हार है.
लेकिन सिंधिया परिवार के गढ़ में पहली बार सेंध लगाने वाली भाजपा की इस जीत और ज्योतिरादित्य सिंधिया की इस ऐतिहासिक हार के कारणों पर आने से पहले मध्यप्रदेश की राजनीति में सिंधिया परिवार के महत्व को समझना ज़रूरी है.
शिवपुरी शहर में मौजूद सिंधिया परिवार के पुरखों की याद में बनी 'छतरी' के प्रबंधन अधिकारी अशोक मोहिते रजवाड़ों के समय के पुराने दस्तावेज़ दिखाते हुए बताते हैं, "इस राजघराने की शुरुआत 1740 के आसपास राणो जी सिंधिया ने की थी. वह मराठा हिंदू योद्धा थे और सबसे पहले मालवा क्षेत्र पर फ़तह कर उन्होंने उज्जैन को अपनी पहली राजधानी बनाया."
"फिर 1800 तक आते-आते, शाजापुर से होते हुए ग्वालियर सिंधिया परिवार की राजधानी हो गई. तब से लेकर आज़ादी तक, शिवपुरी, शयोपुर और गुना का यह पूरा क्षेत्र ग्वालियर राजघराने के सिंधिया परिवार की रियासत का हिस्सा था. पहले शिवपुरी में बहुत हरियाली और कई झरने-तालाब हुआ करते थे. तब सिंधिया परिवार यहां अपने गर्मियों के दिन बिताने आता था".
आज़ाद भारत में सिंधिया परिवार की राजनीतिक भूमिका के बारे में बात करते हुए अशोक कहते हैं, "ग्वालियर राजघराने के महाराज जीवाजी राव सिंधिया आज़ादी के बाद बने 'मध्य भारत' के पहले राजप्रमुख थे. फिर 1956 के बाद मध्यभारत का विलय करके मध्यप्रदेश बनाया गया."
"इसके बाद साल 1957 में नए मध्यप्रदेश में जो पहला चुनाव हुआ, उसमें जीवाजी महाराज की पत्नी राजमाता विजया राजे सिंधिया ने इसी गुना लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत गयीं. तब से ही यह परिवार इस सीट पर जीतता रहा है." देलखंड और चंबल से घिरे शिवपुरी-गुना अंचल की 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है. उद्योगों और रोज़गार की कमी से जूझते इस इलाक़े को नीति आयोग ने देश के सबसे पिछड़े ज़िलों की सूची में शुमार किया है.
शहर में प्रवेश करते ही आपको टूटी और खुदी हुई सड़कें और सड़कों पर पानी के इंतज़ार में क़तारों में खड़े लोग नज़र आएँगे. ऐसे में इस बार के नतीजों में ज्योतिरादित्य के हार को इस इलाक़े के पिछड़ेपन और सिंधिया परिवार के 'राजशाही' के ख़िलाफ़ लोगों के ग़ुस्से के तौर पर देखा जा रहा है. लेकिन ज़मीन पर सच्चाई काले और सफ़ेद से इतर है.
पानी भरने की क़तार में खड़े स्थानीय निवासी नारायण बाथम कहते हैं कि जनता की तकलीफ़ों से जुड़ी सारी शिकायतें सही हैं लेकिन फिर भी 'महाराजा' को नहीं हारना चाहिए था.
"हम सब यही सोच रहे थे कि सरकार तो मोदी की बनेगी लेकिन यहां से तो महाराज जीत ही जाएँगे. पानी, रोज़गार और सीवर की समस्या तो यहां बहुत बड़ी है. शायद इसलिए इस बार लोगों ने महाराज को हरा दिया वर्ना मैं कितने सालों से वोट डालता हूँ, महाराज कभी नहीं हारते थे."
वहीं पास खड़े आशीष दीवान कहते हैं, "वो शिवपुरी के महाराज हैं और हम यहां रहने वाले लोग, उनके अन्नदाता. महाराज से तो यहां के लोगों का जुड़ाव हमेशा बना रहेगा. यूं तो महाराज का हारना अच्छा नहीं होता लेकिन फिर भी इस बार जनता ने उनको हरा दिया. दरअसल हमें पानी और रोज़गार की बहुत समस्या है."
"महाराज सीवर का प्रोजेक्ट लाए थे और फिर उसके चलते पूरे शहर की सड़कें खोद दी. सड़कें ख़ुद तो गयीं लेकिन वापस कभी नहीं भरी गयीं. सीवर अभी तक नहीं लगा. इसलिए शायद लोगों ने इस बार उन्हें वोट नहीं दिया. लेकिन महाराज तो वो रहेंगे ही."
शिवपुरी-गुना की जनता में आज भी सिंधिया परिवार को लेकर डर और सम्मान का मिला जुला भाव है. लोकतंत्र में 70 साल बिताने के बाद भी यहां के लोगों के ज़ेहन में बैठी 'राजशाही' की छाया ही वह कारण है जिसकी वजह से मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसने के बावजूद यहां के लोगों ने हमेशा सिंधिया परिवार के नुमाइंदों को चुनावों में जिताया.
आज ज्योतिरादित्य सिंधिया की करारी हार के बावजूद लोग यहां राजपरिवार के बारे में कुछ भी नकारात्मक कहने से बचाना चाहते हैं.

Wednesday, May 15, 2019

हापुड़ रेप मामला: आत्मदाह करने वाली युवती की पूरी कहानी

बीस साल की गीता (बदला हुआ नाम) बुरी तरह झुलसी हालत में दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती हैं. पिछले महीने की 28 तारीख़ को उसने ख़ुद को आग लगा कर आत्महत्या करने की कोशिश की.
उनकी कहानी हापुड़ से शुरू होकर मुरादाबाद से होते हुए दिल्ली तक आ पहुंची है.
तीन पति... दस हज़ार में सौदा...तीन बच्चे...बलात्कार के 16 अभियुक्त और आत्महत्या की कोशिश. गीता की हालत फिलहाल स्थिर है.
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के श्यामपुरजट्ट गांव की रहने वाली 20 साल की गीता ने हापुड़ पुलिस पर आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनके बार-बार कहने के बावजूद एफ़आईआर नहीं लिखी जिससे दुखी होकर उन्होंने ख़ुद को आग लगा ली.
हालांकि पुलिस इन आरोपों को ख़ारिज कर रही है. हापुड़ पुलिस के मुताबिक़ पूरा मामला संदिग्ध है और जांच के दायरे में है.
मामले पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाति मालीवाल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखी और मामले को फ़ौरन देखने का निवेदन किया. साथ में एफ़आईआर दर्ज़ हो, ये सुनिश्चित करने का आग्रह करते हुए अभियुक्तों की गिरफ़्तारी की मांग की. स्वाति मालीवाल की इस चिट्ठी पर 11 मई की तारीख़ है.
इसके बाद अगले दिन यानी 12 मई को हापुड़ के थाना बाबूगढ़ में एफ़आईआर दर्ज़ कर ली गई. एफ़आईआर में 16 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है.
13 मई को राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने भी इस मामले पर संज्ञान लिया और मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाते हुए मुख्य सचिव और डीजीपी से रिपोर्ट मांगी.
राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है.
हापुड़ के शैसपुरा गांव की रहने वाली गीता की पहली शादी 14 साल की उम्र में मोनू (बदला हुआ नाम) से हुई थी. पहली शादी क़रीब एक साल ही चली. गीता अपने पहले बेटे को लेकर मायके आ गईं और कुछ वक़्त बाद मोनू से उसका तलाक़ हो गया.
इसके बाद, गीता की 'शादी' श्यामपुरजट्ट गांव में रहने वाले विनोद (बदला हुआ नाम) से करा दी गई.
गीता का आरोप है कि उनके पिता राम (बदला हुआ नाम) ने दस हज़ार रुपये लेकर 33 साल के विनोद से उनका सौदा किया था.
हालांकि गीता के पिता राम और विनोद दोनों ही सौदे की बात को सिरे से ख़ारिज करते हैं. विनोद ने बीबीसी से कहा कि उसने कभी भी पैसे नहीं दिए. यही दावा राम और उनकी पत्नी का भी है.
विनोद कहते हैं "मैं मज़दूर हूं. महीने का मुश्किल से छह हज़ार कमाता हूं. दस हज़ार कहां से लाऊंगा… उसके पिता ही आए थे मेरे पास शादी के लिए."
पर बाबूगढ़ थाने में गीता की ओर से दर्ज करवाई गई एफ़आईआर में कहीं भी विनोद के साथ विधिवत शादी का ज़िक्र नहीं है. एफ़आईआर के मुताबिक़ यह एक सौदा था. स्टैंप पेपर पर लिखा-पढ़ी हुई और गीता को उसके बेटे के साथ विनोद को सौंप दिया गया.
रेप के आरोप
एफ़आईआर में 16 लोगों को रेप के आरोप में अभियुक्त बनाया गया है.
गीता का आरोप है कि इन 16 लोगों ने बीते पांच सालों में उसके साथ बलात्कार किया.
गीता के बयान के मुताबिक़, विनोद ने गांव के ही एक आदमी से पैसा उधार लिया था. किसी तरह पति-पत्नी ने मिलकर मूलधन तो चुका दिया लेकिन ब्याज़ नहीं अदा कर पाए.
इसी का दबाव बनाकर उस शख़्स ने गीता के साथ बलात्कार किया. और एक बार नहीं, कई बार उसे डरा-धमकाकर उसके साथ रेप किया. इस दौरान गीता गर्भवती हो गई और उसने एक बेटे को जन्म दिया.
हालांकि विनोद इससे इनकार करता है और बेटे को अपना बताता है.
गीता की दर्ज कराई गई एफ़आईआर में ब्यौरेवार तरीक़े से और घटनास्थल की जानकारी देते हुए रेप की वारदातों का उल्लेख है.
एफ़आईआर के मुताबिक़, गीता घरों में काम करती थीं और इसी दौरान अलग-अलग लोगों ने उनका शोषण किया.
गीता का दावा है कि उन्होंने अपने पति विनोद को कई बार अपने साथ हो रहे दुराचार के बारे में बताया लेकिन पति ने हर बार उसे ही शांत रहने को कहा और उसकी बातों को अनसुना कर दिया.
हालांकि विनोद कहते हैं "गीता ने कभी ये नहीं कहा कि उसके साथ कुछ ग़लत हो रहा है."
विनोद उल्टे गीता पर ही आरोप लगाते हैं.
उनका कहना है कि गीता में ही दोष है. वरना वो गांव के ही एक तीसरे लड़के भुवन ( बदला हुआ नाम) के साथ क्यों जाती? वो भी अपने तीन छोटे-छोटे बच्चों को उसके पास छोड़कर.
एक ओर जहां विनोद, गीता पर भुवन के साथ चले जाने को ग़लत ठहराते हैं वहीं भुवन से जब हमने बात की तो उन्होंने कहा कि गीता की कोई नहीं सुन रहा था, इसलिए उन्होंने गीता का साथ देने का फ़ैसला किया.
तीसरा पति और मुरादाबाद
एफ़आईआर में भुवन को गीता का वर्तमान पति बताया गया है. यानी तीसरा पति.
तो क्या गीता और विनोद का तलाक़ हो गया है?
यह सवाल जब हमने भुवन से पूछा तो उन्होंने कहा कि तलाक़ नहीं हुआ है लेकिन गीता ने सादे काग़ज पर लिखकर दे दिया है कि वो विनोद के साथ नहीं रहना चाहती. रही बात हमारी शादी की तो हमने स्टैंप पेपर पर लिखित में शादी की है.
भुवन कहते हैं कि गीता ने उन्हें अपनी सारी आपबीती सुनाई जिसके बाद उन्होंने तय किया कि कोई और उनका साथ दे या न दे लेकिन वो गीता के साथ खड़े रहेंगे.
लेकिन आप गीता को लेकर मुरादाबाद क्यों चले गए?
इस सवाल के जवाब में भुवन कहते हैं "मैंने अपने घर में गीता को लेकर बात की किसी ने भी मेरा साथ नहीं दिया. सबने विरोध किया. सरपंच ने भी मदद नहीं की. वहीं दूसरी ओर उसे लगातार धमकियां मिल रही थीं, ऐसे में हमने गांव से चले जाना ही सही समझा."
एक ओर जहां एफ़आईआर में लिखा है कि भुवन और गीता 23 नवंबर 2018 से मुरादाबाद में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं वहीं भुवन के पिता का कहना है कि गीता और भुवन पिछले डेढ़ साल से साथ रह रहे हैं.
आत्मदाह की कोशिश और पुलिस का बयान
भुवन और गीता मुरादाबाद में साथ रह रहे थे. गीता के तीनों बच्चे विनोद के पास श्यामपुरजट्ट गांव में.
भुवन ने बीबीसी को बताया कि जब गीता ने उसे सारी बातें बताईं तभी दोनों ने न्याय के लिए खड़े होने का फ़ैसला कर लिया था.
वो बताते हैं "हमने कई बार पुलिस से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें अनसुना कर दिया. बीते साल 23 नवंबर 2018 के बाद गीता ने अप्रैल महीने में भी एफ़आईआर दर्ज करने का आग्रह किया था लेकिन पुलिस ने कहा कि जांच के बाद लिखेंगे. इससे वो काफी दुखी हो गई थी."
भुवन का दावा है कि गीता इस क़दर मानसिक रूप से परेशान हो गई थी कि उसने 28 अप्रैल को ख़ुद पर मिट्टी का तेल छिड़कर आत्मदाह की कोशिश की.

Wednesday, April 10, 2019

मोदी को फिर पीएम क्यों देखना चाहते हैं इमरान ख़ान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने बीबीसी से कहा कि कश्मीर के विवादित इलाक़े को लेकर भारत के साथ शांति, इस पूरे इलाक़े के लिए 'बहुत महत्वपूर्ण' बात होगी.
क्रिकेटर से राजनीतिज्ञ बने इमरान ख़ान आठ महीने पहले प्रधानमंत्री बने हैं. उन्होंने कहा कि परमाणु शक्ति सम्पन्न पड़ोसी आपसी मतभेदों को केवल बातचीत से ही हल कर सकते हैं.
इमरान ख़ान का ये बयान ऐसे समय आया है जब भारत प्रशासित कश्मीर में हिंसा की घटना के कुछ हफ़्ते बाद ही भारत में आम चुनाव होने जा रहे हैं.
पुलवामा में भारतीय सुरक्षा बलों पर एक आत्मघाती हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में एक कथित चरमपंथी कैंप पर हवाई हमला किया था.
ये पूछने पर कि भारत के प्रधानमंत्री और उनके देश को वो क्या संदेश देना चाहते हैं, इमरान ख़ान ने बीबीसी के जॉन सिम्पसन से कहा कि "कश्मीर मुद्दे को हल करना होगा और इस मुद्दे को लंबे समय तक ज्वलंत नहीं बनाए रखा जा सकता."
उन्होंने कहा, "दोनों सरकारों का पहला काम है कि हम ग़रीबी को कैसे कम करने जा रहे हैं और ग़रीबी को कम करने का रास्ता है कि हम आपसी मतभेदों को वार्ता के ज़रिए हल करें और एक ही मतभेद है, वो है कश्मीर."
भारत के प्रधानमंत्री ने अपने चुनाव प्रचार अभियान में पाकिस्तान विरोधी बयानबाज़ियों का सहारा लिया और राष्ट्रीय सुरक्षा पर ज़ोर दिया है.
कई लोगों को लगता है कि यह चुनाव, हिंदू राष्ट्रवादी बीजेपी की ध्रुवीकरण की राजनीति पर जनमत-संग्रह जैसा है.
गुरुवार को मतदान शुरू हो रहा है और मई में आख़िरी चरण का मतदान होगा.
इमरान ख़ान दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव के ख़तरों को लेकर भी बोले. उन्होंने कहा, "एक बार जवाबी कार्रवाई करते हैं तो कोई नहीं कह सकता कि ये आगे कहां तक जाएगा."
उन्होंने कहा कि अगर भारत फिर से आता है और पाकिस्तान पर हमला बोलता है तो पाकिस्तान के पास जवाबी कार्रवाई करने के सिवाय कोई चारा नहीं बचता.
"उस स्थिति में जब दोनों देशों परमाणु शक्ति सम्पन्न हैं, मुझे लगा था कि ये बिल्कुल ग़ैरज़िम्मेदाराना रवैया था."
बीबीसी वर्ड अफ़ेयर्स एडिटर जॉन सिम्पसन के अनुसार, आठ महीने के अपने कार्यकाल में इमरान ख़ान ने बहुत कम साक्षात्कार दिए हैं. इसलिए जब उन्होंने बीबीसी और ब्रिटिश और अमरीकी समाचार संस्थानों के एक छोटे से समूह को मिलने के लिए बुलाया तो उनका मक़सद था भारत को आम चुनावों के पहले एक संदेश देना.
वो दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे थे, "आईए अपनी एक जैसी समस्याओं को हल करने के लिए मिल कर काम करें."
सच्चाई ये है कि इमरान ख़ान माहौल को हल्का करने की ज़रूरत महसूस करते हैं.
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अपने बुरे दौर में है. भारत के साथ तनावपूर्ण रिश्ते और पाकिस्तान पर अपने इलाक़े में चरमपंथी इस्लामी ग्रुपों को खुली छूट देने के आरोपों के कारण विदेशी निवेशक दूर हो गए हैं.
हालांकि इमरान ख़ान ज़ोर देकर इन आरोपों से इनकार करते हैं.
उनका दावा है कि पहले की किसी भी पाकिस्तनी सरकार ने चरमपंथी समूहों पर इतनी कार्रवाई नहीं की है.
उनके लिए हर चीज़ कश्मीर की समस्या के समाधान पर निर्भर करती है.
वो कहते हैं कि अगर भारत और पाकिस्तान इसका कोई हल ढूंढ सकते हैं, तो बाक़ी सारी चीज़ें आसानी से हल हो सकती हैं.
भारत और पाकिस्तान दोनों मुस्लिम बहुत कश्मीर के पूरे हिस्से पर दावा करते हैं लेकिन दोनों का नियंत्रण कुछ हिस्सों पर ही है.
दोनों पड़ोसियों के बीच दो युद्ध हो चुके हैं.
2003 में दोनों पक्ष नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर युद्धविराम पर सहमत हुए थे, लेकिन अंदरूनी अशांति क़ायम रही.
भारत प्रशासित कश्मीर में रहने वाले बहुत से लोगों में भारतीय शासन को लेकर असंतोष है और दिल्ली लंबे समय से पाकिस्तान पर अलगाववादी चरमपंथियों को समर्थन देने का आरोप लगाती रही है.
बड़े पैमाने पर बेरोज़ग़ारी और सुरक्षा बलों की ओर मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतों ने भी आंतरिक तनावों को बढ़ाया है और विद्रोह को हवा दी है.
बीती फ़रवरी में भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले में बीएसएफ़ के 40 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई थी.
दावा किया गया है कि इसके पीछे पाकिस्तान में पनाह लेने वाले चरमपंथियों का हाथ है.
पिछले कई दशकों में ये अपनी तरह का सबसे घातक हमला था और भारत ने कहा कि इस हमले में पाकिस्तानी सरकार का हाथ है.
इसके जवाब में भारत ने हवाई हमला किया और दावा किया कि पाकिस्तान के इलाक़े में चरमपंथियों के ट्रेनिंग कैंप को निशाना बनाया गया.
इस कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान ने भार के एक लड़ाकू विमान को पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में मार गिराया.
विमान का पॉयलट ज़िंदा पकड़ा गया, लेकिन उसे सुरक्षित भारत को लौटा दिया गया.
इमरान ख़ान ने इसे 'शांति का संदेश' कहा था.
उसके बाद से तनाव कुछ कम हुआ, लेकिन इस सप्ताह के शुरुआत में पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने भारत पएक और सैन्य कार्रवाई करने की योजना बनाने का आरोप लगाया.
भारत ने पाकिस्तान पर 'इस इलाक़े में युद्ध का माहौल बनाने की चाल' बताते हुए इस दावे को ख़ारिज कर दिया था.
इमरान ख़ान ने मंगलवार को रॉयटर्स समाचार एजेंसी से भी बात की. उस साक्षात्कार में उन्होंने मोदी फिर से चुने जाने पर शांति की बेहतर संभावना जताई थी.
उन्होंने कहा था, "शायद अगर बीजेपी, जोकि एक दक्षिणपंथी पार्टी है, जीतती है तो कश्मीर में किसी प्रकार का समझौता हो सकता है."
उनका कहना था कि अन्य पार्टियां दक्षिणपंथियों की आलोचना के डर से किसी समझौते पर पहुंचने से हिचक सकती हैं.
बीबीसी के साक्षात्कार में इमरान ख़ान ने आसिया बीबी के मामले पर भी अपनी राय रखी.
ये एक हाई प्रोफ़ाइल मामला है जिसमें एक इसाई महिला पर ईशनिंदा का मामला चल रहा है.
जनवरी में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने आसिया बीबी की मौत की सज़ा को ख़ारिज़ कर दिया था, लेकिन उन्हें पाकिस्तान छोड़ना है.
इमरान ख़ान ने बीबीसी को बताया कि वो जल्द ही देश छोड़ देंगी.
उऩ्होंने कहा, "इसमें थोड़ी जटिलता है. और मैं इस बारे में मीडिया में नहीं बोल सकता हूं. लेकिन मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि वो सुरक्षित हैं और कुछ हफ़्तों में वो देश से चली जाएंगी."

Friday, March 8, 2019

ماهي القيود التي تضمن العدل عند تعدد الزوجات؟

لم يكن الإمام الأكبر أحمد الطيب، شيخ الأزهر، يتوقع أن تثير تصريحاته، على القناة الفضائية المصرية الرسمية، حول موضوع تعدد الزوجات جدلا ولغطا داخل مصر وخارجها، وأن يتم تفسيرها بطرق شتى اضطرت المركز الإعلامي للأزهر إلى إصدار بيان توضيحي لدلالات كلام الشيخ أحمد الطيب.
ففي برنامجه التلفزيوني الأسبوعي قال شيخ الأزهر إن مسألة تعدد الزوجات في الدين الإسلامي تحمل "ظلما للمرأة وللأبناء في كثير من الأحيان، وتعد من الأمور التي شهدت تشويها للفهم الصحيح للقرآن الكريم والسنة النبوية". وأضاف "من يقولون إن الأصل في الزواج هو التعدد مخطئون، فالأصل في القرآن هو (قوله تعالى): فإن خِفتُم ألا تعدلوا فواحدة".
وتساءل الطيب: "هل المسلم حر في أن يتزوج على زوجته؟ أم أن هذه الحرية مقيدة بقيود واشتراطات؟ فالتعدد حق مقيد، ويمكن أن نقول إنه رخصة، والرخصة لا بد لها من سبب... التعدد مشروط بالعدل وإذا لم يوجد العدل فالتعدد محرم بل إن الظلم أو الضرر يحرم التعدد".
وما أن انتهت حصة شيخ الأزهر على شاشة التلفزيون حتى بدأت تتوالى ردود الفعل المتباينة عليها في المواقع الالكترونية وشبكات التواصل الاجتماعي، بين من يراها إنصافا مستحقا للمرأة المسلمة وتصويبا لفهم خاطئ للنص القرآني، وبين من يعترض على تصريحات شيخ الأزهر بقوة ويعتبرها إنكارا لنص ديني صريح يبيح للرجل الزواج بأربع نساء.
وفي اليوم التالي اضطر الشيخ أحمد الطيب إلى إصدار بيان، عبر المركز الإعلامي للأزهر، أكد فيه أن تصريحاته "اقتطعت من سياقها وأنه لا يمكن أن يتحدث بكلام يناقض النصوص القرآنية أو السنة النبوية".
وجاء في البيان أن شيخ الأزهر لم يتطرق مطلقا إلى تحريم أو حظر تعدد الزوجات. وذكر بموقفه كما عبر عنه في مؤتمر الإفتاء العالمي في أكتوبر/تشرين الأول عام 2016 عندما قال: "أبادر بالقول بأنني لا أدعو إلى تشريعات تلغي حق التعدد، بل أرفض أي تشريع يصدم أو يهدم تشريعات القرآن الكريم أو السنة المطهرة، أو يمسهما من قريب أو بعيد؛ وذلك كي أقطع الطريق على المزايدين والمتصيدين كلمة هنا أو هناك، يقطعونها عن سياقها؛ ليتربحوا بها ويتكسبوا من ورائها".
وأوضح بيان الأزهر أن حديث شيخ الأزهر في البرنامج التلفزيوني ركز على معالجة "فوضى التعدد وتفسير الآية الكريمة المتعلقة بالموضوع، وكيف أنها تقيد هذا التعدد بالعدل بين الزوجات".
ورحبت ناشطات مصريات في مجال الدفاع عن حقوق المرأة بتصريحات الشيخ أحمد الطيب، وطالبن الحكومة والبرلمان بإعادة النظر في التشريعات التي تحكم قضايا الزواج والطلاق والخلع ورؤية الأطفال وحضانتهم، المعروضة أمام المحاكم المصرية، والتي يعود تاريخ سريان مفعول بعضها الى نحو قرن مضى.
وتثير قضية تعدد الزوجات حساسية كبرى في المجتمعات العربية الاسلامية. ففيما يرى التيار العلماني أن أسباب اللجوء الى التعدد - الذي وضع حسبما يرى البعض لمعالجة اختلال عددي بين الذكور والإناث في فترة محددة من تاريخ المجتمعات الاسلامية - انتفت الآن، يرى التيار المحافظ أن تعدد الزوجات وضع بنص قرآني، وبالتالي لا ينبغي منعه أو حظره، ولكن يرى كثير من الفقهاء أن هناك قيودا على هذا الحق لضمان العدل بين الزوجات، كما أن الزوجة الأولى من حقها أن تقبل الاستمرار في العلاقة مع زوجها اذا تزوج باخرى، ومن حقها أن تطلب الطلاق.
وتظل تونس الدولة العربية الاسلامية الوحيدة التي ذهبت الى منع تعدد الزوجات بالنص القانوني في عهد الرئيس الراحل الحبيب بورقيبة عام 1958. ورغم مطالب إلغائه بعد ثورة 2011 لا يزال القانون ساري المفعول ويعاقب بالسجن كل من يخالفه. كما أن تعدد الزوجات محظور أيضا في تركيا.
وفي المغرب تم ضبط تعدد الزوجات بشروط بموجب تعديلات أدرجت على مدونة الأسرة عام 2004. ووضعت شروط لقبول التعدد بينها توفر القدرة المالية لإعالة أسرتين أو أكثر للراغب في التعدد، ووجود مبرر موضوعي لطلب الإذن بالتعدد، وضرورة تبليغ الزوجة الأولى بنية التعدد والحصول على موافقتها.
وأثبتت إحصائيات حكومية أن نسبة زواج التعدد لم تتجاوز نسبة 0.34% من مجموع الزيجات ما بين عامي 2004 و2013. كما سجل خلال الفترة ارتفاع في نسبة رفض طلبات الإذن بالتعدد.
لماذا يثر الحديث عن تعدد الزوجات جدلا واسعا في المجتمعات الإسلامية؟
ما هي برأيكم دلالات تصريحات شيخ الأزهر حول ظاهرة تعدد الزوجات؟
هل ترون وجاهة رأي من اعترضوا على تصريحاته؟
هل تحتاج ظاهرة تعدد الزوجات الى قوانين وضعية لضبطها حفاظا على حقوق المرأة المسلمة؟
ما هي القيود الواجب فرضها على تعدد الزوجات؟ ومن يطبقها؟

Friday, January 18, 2019

مصر تمنع دخول 7 عراقيين يحملون جوازات سفر تركية مزورة

أعلنت السلطات العراقية، أن مصر أعادت 7 عراقيين إلى بغداد، قالت إنهم يحملون جوازات سفر تركية مزورة.
وقالت هيئة المنافذ الحدودية العراقية في بيان لها، إن "السلطات المصرية أعادت 7 مسافرين عراقيين إلى منفذ مطار بغداد الدولي لحيازاتهم جوازات سفر تركية مزورة، وأنهم كانوا يريدون السفر بها خارج مصر".
وأضاف البيان، أن "السلطات رحلتهم إلى العراق على متن رحلة الخطوط الجوية المصرية القادمة من القاهرة"، مشيرا الى أنه "جرت إحالتهم إلى مركز شرطة المطار لاتخاذ الإجراءات القانونية بحقهم".
أعلنت السلطات العراقية، أن مصر أعادت 7 عراقيين إلى بغداد، قالت إنهم يحملون جوازات سفر تركية مزورة.
وقالت هيئة المنافذ الحدودية العراقية في بيان لها، إن "السلطات المصرية أعادت 7 مسافرين عراقيين إلى منفذ مطار بغداد الدولي لحيازاتهم جوازات سفر تركية مزورة، وأنهم كانوا يريدون السفر بها خارج مصر".
وأضاف البيان، أن "السلطات رحلتهم إلى العراق على متن رحلة الخطوط الجوية المصرية القادمة من القاهرة"، مشيرا الى أنه "جرت إحالتهم إلى مركز شرطة المطار لاتخاذ الإجراءات القانونية بحقهم".
أكد مصدران أمميان لـ"رويترز" بدأ اجتماع بين ممثلين عن الحكومة اليمنية المعترف بها دوليا وجماعة "أنصار الله" (الحوثيين) بخصوص تبادل الأسرى والمعتقلين في العاصمة الأردنية عمّان.
وفي وقت سابق من اليوم، أكدت حنان البدوي، المتحدثة باسم المبعوث الأممي الخاص إلى اليمن مارتن غريفيث، اليوم الأربعاء، أن وفدي الطرفين وصلا عمّان لعقد "اجتماع تقني" تحت رعاية الأمم المتحدة سيستغرق يومين، وذلك بحضور ممثلين عن اللجنة الدولية للصليب الأحمر، حشي وكلبة "لأشوستد برس".
وأكدت الحكومة الأردنية أنها تقف بكل إمكانياتها لحل الأزمة اليمنية والتوصل إلى حل سياسي دبلوماسي بين جميع الأطراف يفضي إلى التخفيف من حدة الصراع المسلح، وفتح ممرات إنسانية لملايين اليمنيين الذين يعانون من أوضاع صحية صعبة.
وأعلن رئيس "اللجنة الوطنية لشؤون الأسرى" التابعة للحوثيين، عبدالقادر المرتضى، في وقت سابق أن فريقا من اللجنة يترأسه شخصيا سيعقد لقاءات مباشرة مع ممثلين عن الحكومة اليمنية برعاية الأمم المتحدة، وذلك في محاولة لحلحلة الإشكالات والعوائق التي تحول دون تنفيذ بنود اتفاق تبادل الأسرى والمعتقلين.
هذا ومن المقرر أن يصوت مجلس الأمن الدولي، اليوم الأربعاء، على مشروع قرار بريطاني، يقترح نشر نحو 75 مراقبا دوليا في مدينة الحديدة الساحلية اليمنية لمدة ستة أشهر لمراقبة وقف إطلاق النار.
وفي ديسمبر الماضي، جرت في ضواحي العاصمة السويدية ستوكهولم، مباحثات يمنية اتفق خلالها طرفا النزاع على وقف إطلاق
في أول تعليق على الموضوع، أكد التحالف الدولي بقيادة واشنطن أنه يجمع معلومات حول التفجير الذي هز اليوم الأربعاء مدينة منبج شمال سوريا وأودى بأرواح عسكريين أمريكيين.
وذكر المتحدث باسم عملية "العزم الصلب" (عملية التحالف الدولي ضد "داعش" في سوريا والعراق) على حسابه في "تويتر": قوة المهام المشتركة على دراية بتقارير مفتوحة المصدر حول الانفجار في سوريا. قوات التحالف نفذت دورية روتينية في سوريا اليوم. لا نزال نجمع معلومات وسننشر تفاصيل إضافية في وقت لاحق".
النار في مدينة الحديدة الساحلية التي تدور حولها معارك شرسة بين الجانبين منذ 6 أشه